विद्या भारती संस्थान उदयपुर द्वारा संचालित विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय सेक्टर 4 में जिला स्तरीय एक दिवसीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के प्रांत शिशु वाटिका प्रमुख पूनम चंद राठौड़ के सानिध्य में संपन्न हुई । वर्ग में जिले की 23 शिशु वाटिका के 68 अध्यापकों ने भाग लिया ।
उद्घाटन सत्र में जिला सचिव कालू लाल चौबीसा ने अतिथि परिचय के साथ इस वर्ग की भूमिका रखी l प्रांत शिशु वाटिका प्रमुख पूनम चंद ने शिशु वाटिका क्या, क्यों और कैसे ? विषय पर आचार्य ,दीदी के साथ चर्चा की,उन्होंने बताया कि बालक के मस्तिष्क का 85% विकास शून्य से 5 वर्ष तक की आयु में ही होता है तथा बालक का विकास गर्भावस्था से ही प्रारंभ हो जाता है। अतः बालक को शिक्षा व संस्कार देने के लिए जीरो से 5 वर्ष तक की आयु ही उपयुक्त होती है । इसमें जो ज्ञान प्राप्त होता है वह जीवन भर के लिए स्थाई होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिशु शिक्षा के लिए ECCE (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) के अंतर्गत शिशु वाटिका की 12 व्यवस्थाओं पर आधारित शिक्षण की व्यवस्था है। उन्होंने कहा ,कि बालक को इस आयु में स्नेह, सुरक्षा व स्वतंत्रता की आवश्यकता होती है, और इसी आधार पर यदि बालक को सिखाया जाए तो बालक का समग्र विकास होता है।
रात्रीकालीन सत्र मे शिव प्रसाद क्षेत्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ उन्होंने कहा शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए शिशु वाटिका पद्धति से ही शिक्षण कार्य करवाया जाए, शिशु विकास की प्रक्रिया ,शिक्षण की विधियां बारे में भी बताया श्रीमती हेमलता दवे जिला शिशु वाटिका प्रमुख ने शिशु वाटिका की 12 शैक्षिक व्यवस्थाएं में गतिविधि आधारित खेल आधारित शिक्षण क्रियाकलापों के माध्यम से कैसे कराया जाए हमें कक्षा में गतिविधि आधारित शिक्षण कैसे करवाना चाहिए इसका प्रयोग भी प्रस्तुत किया।
चतुर्थ सत्र में पूनम चंद राठौड़ ने शिशु वाटिका में पढ़ाने वाले आचार्य , दीदियों की संख्या तथा संपन्न कार्यक्रमों की जानकारी ली तथा अंतिम सत्र में शिशु वाटिका के आगामी वार्षिक कार्यक्रम तथा कार्य योजना पर विस्तृत चर्चा हुई ।
समापन सत्र में जिला सचिव कालू लाल चौबीसा ने कहा कि अपने आप में विश्वास होना चाहिए सकारात्मक सोच रखते हुए कार्य करना व्यक्ति को कामयाब बनता है, वह कामयाबी के लिए उन्होंने पांच बातें बताई सकारात्मक सोच, दृढ़ निश्चय,अनुशासन, साहस, काम के प्रति समर्पण भाव व्यक्ति को कामयाब बनाती है अंत में जिले की शिशु वाटिका प्रमुख हेमलता दवे ने आभार व्यक्त किया।
शांति मंत्र के साथ में इस प्रशिक्षण वर्ग का समापन हुआ।

