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वागड़ में मुद्दे गायब, सबको-सबसे लग रहा डर, टिकट और पार्टी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

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रिपोर्ट : सुशील जैन
24 न्यूज अपडेट. बांसवाड़ा। वागड़ हॉट सीट है, प्रत्याशी भी तगड़े हैं लेकिन इस सीट पर अब मुद्दे गायब हो गए हैं और अब आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कौन पहले किस पार्टी में था, अब किससे लड़ रहा है। किसने किसको और कब समर्थन दिया और अब किस पार्टी का होते हुए किसका प्रचार करने निकल पड़ा है। और कौन किस पार्टी को जड़ से ही खत्म कर देना चाहता है, यही मुद्दे रह गए हैं; बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे धूल खा रहे हैं। जनता हतप्रभ है कि बिना मुद्दों के ही चुनावी अखाड़े में नेता पहलवानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। मजे की बात है कि इस सीट पर अभी सबको सबसे डर लग रहा है। मालवीया को डर है कि कांग्रेस और बाप एक हो गए और वोटरों का धु्रवीकरण हो गया तो क्या होगा। बाप प्रत्याशी को डर है कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी वोट कटवा सबित हो गया तो पूरा गणित बिगड़ जाएगा। कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा पुराने खांटी कांग्रेसी जो चाहते हैं कि वागड़ मेंं चाहे हार हो मगर कांग्रेस का टाइगर जिंदा रहे, वे हर हाल में कांग्रेस के सिंबोलिक प्रत्याशी का साथ नहीं छोड़ना चाहते। वे जानते हैं कि यदि अबकी बार बदलाव की बयार बह गई तो कांग्रेस के साथ ही उनकी बरसों की राजनीति का भी पत्ता साफ होने में देर नहीं लगेगी। कुल मिलाकर वक्त का चक्का घूम रहा है और हर तरफ कंफ्यूजन का कोहरा फैला हुआ है। मालवीया को पीएम मोदी की सभा का बूस्टर मिलने वाला है तो बाप को पब्लिक बूस्टर पर ही भरोसा है। उसका प्रचार तंत्र भी अनूठा है जो सोशल मीडिया पर ज्यादा नजर नहीं आता है।
कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री वर्तमान विधायक अर्जुन सिंह बामनिया इन दिनों अपनी पार्टी के प्रत्याशी अरविंद डामोर के विरोध में प्रचार करते दिख रहे हैं। वे मालवीया के विरोध में पार्टी आलाकमान के निर्देश से बंधे हैं जिसमें बाप पार्टी को समर्थन देने की बात कही गई है। अब वे कांग्रेस के प्रत्याशी अरविंद डामोर को छोड़ कर बाप के प्रत्याशी राजकुमार रोत के समर्थन में घर-घर घूम रहे है। यह दिलचस्प बात हो गई है कि दो अलग-अलग पार्टियों के विधायक याने बाप और कांग्रेस के विधायक एक साथ मिल कर एक विधायक याने कि प्रत्याशी बने राजकुमार रोत के लिए वोटों की गोलबंदी करते नजर आ रहे हैं। आपको बाता दें कि यह पॉलिटिकल लोचा नाम वापसी के अंतिम दिन हुआ था जब कांग्रेस के प्रत्याशी अरविंद डामोर गायब हो गए और नाम वापस लेने आए ही नहीं। उन्होंने कह दिया कि पार्टी का उनको दिया हुआ हाथ का सिंबल ही उनके लिए आला कमान है। इसके पीछे क्या राजनीतिक खेल है, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चल सकेगा मगर इसका फायदा उठाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्रजीतसिंह मालवीया उठा रहे हैं। अब उनके पॉलिटिकल बयानों में विकास की गंगा की बजाय बाप और कांग्रेस पर ही ज्यादा केंद्रित हो गई है। मालवीया आरोप लगा रहे हैं कि विधायक बामनिया कांग्रेस पार्टी को खत्म कर रहे हैं, उसे बचे दिया है। जबकि मालवीया खुद कह चुके हैं कि अब वे वागड़ को कांग्रेस मुक्त करना चाहते हैं। तो ऐसे में बाप के दम पर कांग्रेस मुक्त वागड़ का परिदृष्य मालवीया को चिंतित कर रहा है। इधर कांग्रेस पार्टी में दो फाड़ हो गए हैं। विधानसभा चुनाव में अच्छा परफॉरमेंस देने वाले कांग्रेस लोकसभा चुनाव आते-आते खत्म होने की कगार पर दिख रही है या फिर कुछ लोगों का कहना है कि यह केवल लोकसभा चुनाव का टेम्परेरी अरेंजमेंट है। ऐन वक्त पर उसका बाप से गठबंधन करना भी चौंका रहा है। कांग्रेस में भी इन दिनों डूंगरपुर बनाम बांसवाडा चल रहा है। बांसवाड़ा का खेमा जहां बाप पार्टी से गठबंधन पर राजी हो गया है तो डूंगरपुर में जिला स्तर के पार्टी पदाधिकारी गठबंधन के खिलाफ शुरू से हैं व अब उनकी आवाज और अधिक मुखर हो रही है। बांसवाड़ा में भी कुछ विधायक और पदाधिकारी गठबंधन के बाद भी अब तक बाप पार्टी के साथ मिलकर प्रचार प्रसार से दूरी बनाए हुए हैं, शायद यह उनके पिछले अनुभवों का परिणाम है जिसमें पुरानी बीटीपी और अब बाप के नेताओं व उनके बीच जमकर मनभेद हुआ था। इधर कांग्रेस युवा ब्रिगेड में रहे व अब पार्टी से निकाल दिए गए प्रत्याशी अरविंद डामोर ने कहा कि मैं राष्ट्रीय आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व का सम्मान करता हूं जिनके सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक उनका निष्कासन लीगली नहीं हुआ है ऐसे में वे पार्टी में ही हैं। उन्होंने दावा किया कि जिला और मंडल के पदाधिकारी उनके साथ हैं व प्रचार कर रहे हैं। कुछ एमएलए और उनके साथी बाप पार्टी के समर्थन में वोट मांग रहे हैं। वे तंज करते हैं कि वो लोग पार्टी को खत्म करने का प्रयास नहीं करें।

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