‘ देश – विदेश में श्रीराम एवं रामायण की संस्कृति ’’
विषय पर व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन
राम एवं रामायण आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक – प्रो. बीपी शर्मा
रामायण भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर – प्रो. सारंगदेवोत
युवा राम के आदर्शों को जीवन में उतारें …
उदयपुर 04 फरवरी / महाराणा भूपाल सिंह की 140वीं जन्म जयंती पर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विवि एवं लोकजन सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय समारोह के तीसरे दिन सोमवार को कुलपति सचिवालय के सभागार में ‘‘ देश – विदेश में श्रीराम एवं रामायण की संस्कृति ’’ विषयक ज्ञान व्याखानमाला का आयेाजन किया गया। समारोह का शुभारंभ मुख्य वक्ता पेसिफिक विवि के ग्रुप अध्यक्ष प्रो. बीपी शर्मा, मुख्य अतिथि टीकमचंद बोहरा अनजाना – संयुक्त सचिव शासन सचिवालय जयपुर , अध्यक्ष कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, विशिष्ठ अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार द्विवेदी ने मॉ सरस्वती एवं महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।
संस्थान के अध्यक्ष प्रो. विमल शर्मा ने बताया कि मुख्य वक्ता पेसिफिक विवि के अध्यक्ष प्रो. बी.पी. शर्मा ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि विश्व के लिए राम और रामायण आज भी प्रासंगिक हैं। जब अयोध्या में राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी तब छहों महाद्वीपों में दीपावली की तरह कार्यक्रमों के आयोजन किये गये। उन्होंने कहा कि वाल्मिकी रामायण में 12 हजार किलोमीटर दूर जावा सुमात्रा की जानकारी भी मिलती है। मुस्लिम बाहुल्य में रामायण नाट्य समितियॉ बनी हुई है, इसी प्रकार लाओस, मलेशिया हिकारत सेरी राम , फिलिपिन्स में सिनकिन रामायण प्रचलित है। दक्षिण अमेरिका में हनुमान एवं मकरध्वज की प्रतिमाएॅ देखने का मिलती हैं। वाल्मिकी रामायण के काल्पनिक नहीं होने के साक्ष्य में बताया कि इसमें चार दंत वालें हाथियों का वर्णन मिलता है जो पुरातात्विक आधार पर 10 लाख वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके हैं।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि रामायण भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, हर कण में राम विद्यमान है। भगवान श्रीराम साधन नहीं साध्य है। युवा को राम के आदर्शो को अपने जीवन में उतारना होगा। राम का नाम ही मानवता का उद्धार है। राम का प्रत्येक चरित्र मानव मात्र के लिए भक्ति व मुक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि अपना चित्र ही नहीं, अपना चरित्र भी सुंदर रखिए। भवन ही नहीं, भावना भी सुंदर रखिए। नजर ही नहीं, नजरिया भी सुंदर रखिए, कर्म के प्रति सजगता ही नही, कर्मो में शुचिता भी रखिए, तभी श्रीराम को पायेंगे। आज की युवा पीढ़ी अच्छे पैकेज के कारण हमारे सनातन मूल्यों एवं संस्कृति से दूर होती जा रही है जो ठीक नहीं है। श्रीराम और रामायण एक ऐसे ग्रंथ का नाम है जिससे हमारी प्राचीन सभ्यता , संस्कृति और जिन मूल्यों की हम बात करते है उन्हे हम पुनरस्थापित कर सकते हैं। रामायण में यजुर्वेद के संदेशों की गुूंज सुनाई देती हैं। रामायण से धर्म एवं आध्यात्म ही नहीं अपितु प्रबंध और अर्थशास्त्र की सीख लेना भी आवश्यक है। अपने अंदर के विकारों को दूर करके ही राम को पाया जा सकता है। राम से तात्पर्य राष्ट्रीय मर्यादा को लेने पर ही भारत 2047 तक विश्व में अग्रणी राष्ट्र बन पायेगा।
डॉ. सुरेन्द्र द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि राम तो घट-घट में हैं राम को पाना है तो हमें साधना करनी होगी। राम के अलौकिक रूप को क्षमा, सहनशीलता, दया एवं करूणा के माध्यम से महसूस कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं का आव्हान किया कि वे राम के आदर्शो को अपने जीवन में उतारें।
टीकमचंद बोहरा ने कहा कि राम का चरित्र इतना विशाल है कि यदि उसमें कुछ अंश भी हमारे जीवन के व्यवहार में डाल दें तो हमारा उद्वार हो सकता है। मानव का कल्याण हो सकता है। रविदास के दोहे को प्रस्तुत करते हुए राम के सौहार्द्ध एवं समन्वयक की छवि पर प्रकाश डाला। अनंत अगोचर अविनासी राम, बसे है हम सभी में राम।
श्याम सिंह राजपुरोहित ने कहा कि यदि हम अपने चित को निर्मल कर लें , हमारे अवगुणों को दूर कर लें, तो राम स्वयं हमारे हद्धय में आकर बिराजमान होंगे। हम राम को मानें, उससे कई ज्यादा है कि हम राम की माने। राम ने जो रास्ता दिखाया हम उस रास्ते पर चलेंगे तो हमारा सभी तरह का कल्याण होगा। आज पूरा देश ही नहीं , विश्व राममय बन गया है। रामायण की चौपाईयों में छुपे अनंत चैतन्य को उजागर करते हुए मानव कल्याण के सूत्र बताए।
संचालन डॉ. मनीष श्रीमाली ने किया जबकि आभार महासचिव जयंिकशन चौबे ने जताया।
निजी सचिव केके कुमावत ने बताया कि इस अवसर पर पूर्व ग्रुप केप्टन गजेन्द्र सिंह शक्तावत, प्रो. विमल शर्मा, जयंिकशन चौबे, इन्द्रसिंह राणावत, डॉ. मुमिता चौधरी – झारखंड, गणेश लाल नागदा, हरीश छतलानी, हरिशंकर पुरोहित, श्यामसुंदर भटट्, डॉ. जीएल मेनारिया, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. रमाकांत शर्मा, सुधीर सालुंके, श्रीरत्न मोहता, एडवोकेट सुनील त्रिपाठी, मनोहर लाल मुंदड़ा, अविनाश खटीक, बीएल धुप्पड, संजय प्रसाद वारी- रतलाम, पम्मी पहाड़िया, रेणु सोजावत सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
पुस्तक विमोचन एवं वरिष्ठ सम्मान समारोह आज:-
पांच दिवसीय समारोह के तहत मंगलवार को राजस्थान विद्यापीठ के प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में वरिष्ठ सम्मान समारोह एवं पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया जायेगा। समारोह के मुख्य अतिथि पैसिफिक विवि के अध्यक्ष प्रो. के.के. दवे, माण्डल विधायक उदयलाल भड़ाणा, सम्मानीय अतिथि पूर्व प्रधान – बनेड़ा ठि. हाथीपुरा महाराज गजराज सिंह राणावत होंगे जबकि अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.़एस. सारंगदेवोत करेंगे।

