24 न्यूज अपडेट. पतंजलि विज्ञापन केस में मंगलवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच के सामने आज फिर से बाबा रामदेव और कंपनी के एमडी बालकृष्ण तीसरी बार पेश हुए। बाबाजी के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि हम कोर्ट से एक बार फिर माफी मांगते हैं। हमें पछतावा है। हम जनता में माफी मांगने को तैयार हैं। कोर्ट ने कहा- हम बाबा रामदेव को सुनना चाहते हैं। जस्टिस कोहली ने कहा- आपने (रामदेव) योग के लिए बहुत कुछ किया है। आपका सम्मान है, लेकिन ये जो स्टेटमेंट दिए हैं- परम आदरणीय जज साहिब महोदया। अनकंडीशनली जो भी हमसे हुई हम अपोलोजाइज किए हैं। आपने क्या सोचा कि आप प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रचार करेंगे? जिस चीज का आप प्रचार कर रहे हैं, हमारी संस्कृति में ऐसी कई चीजें हैं। लोग सिर्फ ऐलोपैथी नहीं, घरेलू पद्यतियां भी इस्तेमाल कर रहे हैं। नानी के नुस्खे भी। आप अपनी पद्यतियों के लिए दूसरों को खराब क्यों कह रहे हैं। इस पर बाबा रामदेव ने कहा- किसी को भी खराब कहने का हमारा कोई इरादा नहीं था। आयुर्वेद को रिसर्च बेस्ड एविडेंस के लिए तथ्य पर लाने के लिए पतंजलि ने प्रयास किए हैं। आगे से इसके प्रति जागरूक रहूंगा। कार्य के उत्साह में ऐसा हो गया। आगे से नहीं होगा। कोर्ट ने कहा- आप इतने मासूम नहीं हैं। ऐसा लग नहीं रहा है कि कोई हृदय परिवर्तन हुआ हो। अभी भी आप अपनी बात पर अड़े हैं। हम इस मामले को 23 अप्रैल को देखेंगे। आपको बता दें कि बाबा रामदेव की तरफ से 2 अप्रैल को जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच में माफीनामा दिया गया था। बेंच ने पतंजलि को फटकार लगाते हुए कहा था कि ये माफीनामा सिर्फ खानापूर्ति के लिए है। आपके अंदर माफी का भाव नहीं दिख रहा। इसके बाद कोर्ट ने 10 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की थी। कोर्ट ने 10 अप्रैल की सुनवाई में बाबा रामदेव और बालकृष्ण के दूसरे माफीनामे को भी खारिज किया था। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच ने पतंजलि के वकीलों से कहा था- आपने जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, कार्रवाई के लिए तैयार रहें। कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को भी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र से खत आता है कि आपके (उत्तराखंड सरकार) पास मामला है। कानून का पालन कीजिए। 6 बार ऐसा हुआ। बार-बार लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर चुप रहे। इसके बाद जो आए, उन्होंने भी यही किया। तीनों अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए।
कोर्टरूम में यह हुआ
रामदेवः मैं इस तथ्य के प्रति 100 फीसदी जागरुक रहूंगा। मेरे लिए अशोभनीय है कि ये सब बातें हों।
बालकृष्णः जो भी हुआ, वो अज्ञानतापूर्वक हुआ है। इस गलती के प्रति क्षमाप्रार्थी हैं।
जस्टिस अमानतुल्लाहः ये बहुत गलत है कि आपने ऐलोपैथी पर कटाक्ष किया है।
रामदेवः ऐलोपैथी को भी साइंस कहा गया है और इन दोनों शाखाओं के बीच विवाद चलता रहा है। विकीपीडिया वगैरह पर भी।
जस्टिस अमानतुल्लाहः लेकिन आपने क्या किया, आप अपना काम करो।
जस्टिस हिमा कोहलीः हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम माफ कर देंगे आपको। आपका इतिहास हम अनदेखा कर दें। इस कोर्ट के आदेश थे, तब भी आपने अवहेलना की। आप इतने मासूम नहीं हो।
जस्टिस कोहलीः आपको यह हक किसी ने नहीं दिया कि आप दूसरे के सिस्टम को शूट डाउन करें।
रामदेवः उसके लिए मैं विनम्र भाव से कह रहा हूं कि वो बातें नहीं कहनी चाहिए थीं। हम एविडेंस बेस्ड मोल-भाव का ध्यान रखेंगे।
जस्टिस कोहलीः बीमारियों के लिए दवाओं की पब्लिसिटी की इजाजत नहीं है। ना फॉर्मेसी और ना डॉक्टर कर सकते हैं। आज तक इस वाली बीमारियों के लिए किसी ने भी एडवर्टाइज नहीं किया। बिल्कुल गैर-जिम्मेदार वाली हरकत है। देश के हर नागरिक के लिए नियम हैं।
जस्टिस अमानतुल्लाहः कानून सबके लिए एक है।
रामदेवः आगे से इसके प्रति जागरूक रहूंगा। कार्य के उत्साह में ऐसा हो गया। आगे से नहीं होगा।


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By desk 24newsupdate

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