24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है व पेनल्टी वसूली जा रही है। बुधवार को स्वास्थ शाखा ने सफाई व्यवस्था लापरवाही पाए जाने पर रेस्टोरेंट संचालक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ₹9000 की सास्ती काटी गई। लेकिन इसके साथ ही निगम अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहा है। शहर के कई मोहल्लों में कचरा संग्रहण वाहन कई कई दिनो ंतक नहीं आ रहा है। सीएम पोर्टल और निगम की हैल्पलाइन पर शिकायत के बाद भी तीन चार दिन बार वाहन आता है व स्टाफ कम होने, ड्राइवर के नहीं आने सहित अन्य बहाने बना कर साइन करवा कर ले जाता है। शिकायत बंद कर दी जाती है व कुछ दिनों में फिर वहीं स्थिति हो जाती है। जो लोग कचरा संग्रहण को आते हैं उनका कहना है कि काम का भारी दबाव है। उनको जो आदेश होता है वे वहीं काम करते है। लोगों का कहना है कि ठेकेदारों से मिलीभगत व भारी भ्रष्टाचार की वजह से यह सब हो रहा है। ठेकेदारों के काम की नियमित जांच नहीं हो रही है उनको ब्लैक लिस्ट नहीं किया जा रहा है क्योंकि वे अंदर तक जड़े जमाए हुए बैठे हैं। उन पर कई नेताओं का भी हाथ है जो फंसने पर उनकी पैरवी करने पहुंच जाते हैं। इसके साथ ही कई जगह पर खुले में कचरे में ढेर लगे हैं जिन पर निगम ध्यान नहीं दे रहा है।
इधर, बुधवार को राडा जी चौराहा स्थित रेस्टोरेंट संचालक द्वारा आसपास पर गंदगी फैलाई जा रही थी। रेस्टोरेंट संचालक ने सीवर कनेक्शन भी नहीं ले रखा था, ऑयल और मल आदि को खुले स्थान पर बहाया जा रहा था। रेस्टोरेंट में धुएं, छौंक को निकालने इत्यादि की समुचित व्यवस्था नहीं होने से आसपास के निवासियों, राहगीरों को भारी परेशानी हो रही थी। इसी को लेकर नगर निगम की स्वास्थ शाखा ने रेस्टोरेंट संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए ₹9000 की सास्ती वसूली कर भविष्य में सभी व्यवस्थाएं नियमों अनुसार रखने के निर्देश दिए हैं। बार-बार कहने की बावजूद यदि कोई आदेश की अवहेलना की जा रही थी।
बाहर की कॉलोनियों में तो और भी बुरे हाल
निगम क्षेत्र में ही ठीक से सफाई नहीं हो रही है लेकिन बाहर के इलाकों में से हालाता और बुरे हैं। लोग खुले में कचरा डाल रहे हैं। सुखेर हो या बेदला, यहां पर कई जगह मुख्य मार्ग पर भी कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। इयके अलावा खुले में कचरा संग्रहण वाहन ले जाने पर भी आज तक निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि यह सब कमिशनबाजी के चक्कर में हो रहा है। अधिकारियों की कार्रवाई की हिम्मत ही नहीं हो रही है।
निगमः एक तरफ गंदगी पर कार्रवाई, दूसरी तरफ कई-कई दिनों तक नहीं आ रहा कचरा संग्रहण वाहन, खुले में ले जा रहे कचरा

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