-प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत बोले— “झाला मान सिंह का बलिदान नेतृत्व और राष्ट्रधर्म की अनुपम मिसाल है” उदयपुर. बड़ी सादड़ी जैन मित्र मंडल, उदयपुर के तत्वावधान में मंगलवार को 449वां झाला मान बलिदान दिवस श्रद्धा, गर्व और ऐतिहासिक चेतना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मोती मगरी स्थित झाला मान सिंह स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पण एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मेवाड़ की वीर परंपरा और राष्ट्र समर्पण की भावना को पुनः स्मरण किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (कर्नल) शिव सिंह सारंगदेवोत थे, जबकि अध्यक्षता मोती मगरी स्मारक समिति के सचिव के.सी. शर्मा ने की। अतिथियों का स्वागत मित्र मंडल के सचिव कमलेश सामोता द्वारा किया गया, जिन्होंने कहा कि – “झाला मान सिंह जैसे वीरों की गाथाएं नई पीढ़ी के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत हैं। हमारा उद्देश्य है कि ऐसे गौरवशाली बलिदानों की स्मृति जन-जन में जीवित रहे।” समारोह का शुभारंभ झाला मान सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इसके पश्चात मंच पर उपस्थित अतिथियों – प्रो. सारंगदेवोत, के.सी. शर्मा, प्रकाश मेहता, जीवनलाल दक, विनोद गदिया, श्याम नागोरी आदि का पारंपरिक स्वागत माल्यार्पण, उर्पणा एवं पगड़ी पहनाकर किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. सारंगदेवोत ने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में हल्दीघाटी युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा –“जब हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप पर संकट आया, तब झाला मान सिंह ने वीरता और राष्ट्रधर्म का जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह इतिहास में दुर्लभ है। स्वयं को महाराणा प्रताप के रूप में प्रस्तुत कर उन्होंने प्राणों की आहुति दी, जिससे महाराणा की रक्षा हो सकी। यह त्याग युगों-युगों तक स्मरणीय रहेगा।” कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे के.सी. शर्मा ने भी झाला मान सिंह के निःस्वार्थ समर्पण और वीरता की सराहना करते हुए कहा –“झाला मान केवल सेनानायक नहीं, बल्कि एक ऐसा राष्ट्रनायक थे जिन्होंने नेतृत्व की परिभाषा को ही बदल दिया। उनका बलिदान आज भी जनमानस को दिशा देता है।”कार्यक्रम में उदयपुर सहित बड़ी सादड़ी, जैन समाज, इतिहास प्रेमी एवं समाजसेवीजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संचालन कमलेश समोता ने भावपूर्ण शैली में किया, जबकि सुनील मेहता ने अंत में सभी अतिथियों, आयोजन समिति और उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्याम नागोरी, प्रकाश मेहता, जीवन दक, विनोद कुमार गदिया, उर्मिला नागोरी, कनक मेहता, आशुतोष पितलिया, उम्मेद कंठालिया आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेजों में डिप्लोमा कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू, अंतिम तिथि 5 जुलाई सात दिवसीय मेवाड़ लघु चित्र शैली व पुरालिपि कार्यशाला का शुभारंभ