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‘चंदा’ मामा दूर के : राइजिंग राजस्थान में 1 लाख करोड़ के निवेश का वादा करने वाले जिंक की सांसद रावत की ठाकुर से शिकायत

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उदयपुर। राइजिंग राजस्थान समिट के लिए पिछले 19 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और राजस्थान सरकार के अन्य सदस्यों व अधिकारियों ने लंदन में जिस वेदांता के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल से मुलाकात की और उन्हें ‘राजस्थान की प्रगति में भागीदार’ बनने के लिए आमंत्रित किया। अग्रवाल के समूह के हिन्दुस्तान जिंक की शिकायत उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने आज केन्द्रीय कोयला, खान एवं स्टील संसदीय समिति के सभापति अनुराग ठाकुर से की। उन्होंने जिंक पर जावर माइंस क्षेत्र में माइनिंग से बढ़ते प्रदूषण, सीएसआर गतिविधियों की कमी से क्षेत्रवासियों को परेशानी आदि मुद्दे उठाए हैं। जबकि सीएम ने अपनी मुलाकात में अग्रवाल की कंपनियों से राइजिंग राजस्थान में योगदान का वादा लिया। अग्रवाल से राजस्थान की प्रगति में भागीदार बनने और विकसित राजस्थान के हमारे प्रयास का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया। अग्रवाल ने भी 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सेंट्रल लीडरशिप सांसद रावत की बात पर गौर करेगी या फिर राइजिंग राजस्थान में वेदांता के साथ कंधे से कंधा मिला कर खुशनुमान तस्वीर पेश करेगी। सांसद ने जो मुद्दे उठाए हैं उनका टाइमिंग भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ सलूंबर में उपचुनाव का माहौल है दूसरी तरफ दीपावली बीत चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सीएसआर फंड के सवाल का चुनावी चंदे से कोई लेना देना है भी या नहीं। कहीं संसाधनों पर वर्चस्व की जंग जैसा तो कुछ नहीं हो रहा। जहां तक प्रदूषण का मसला है तो यदि सवाल इतना बड़ा था तो फिर ऐसा क्या हुआ कि ना तो सांसद और ना ही पार्टी का यह चुनावी मुद्दा बन पाया। कोई प्रॉमिस की बात तो छोडिय़े, कभी सार्वजनिक रूप से पार्टी फोरम पर इस पर ना चर्चा हुई, ना पार्टी स्तर पर कोई राज्य स्तरीय आंदोलन किया गया???
आपको बता दें कि  सीएम से राइजिंग राजस्थान के प्रचार के दौरान मुलाकात में जिंक के प्रमुख अग्रवाल ने अपनी इकाइयों- हिंदुस्तान जिंक, केर्न ऑयल एंड गैस और सेरेन्टिका रिन्यूएबल्स – की सुविधाओं का विस्तार करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही उदयपुर क्षेत्र के आसपास छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों के लिए गैर-लाभकारी आधार पर एक औद्योगिक पार्क स्थापित करने की योजना के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री और अग्रवाल के बीच  गोवर्धन परिक्रमा से संबंधित महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल और आस-पास के क्षेत्रों के विकास पर एकीकृत तरीके से चर्चा भी की गई और कृष्ण भूमि विकास के अंतर्गत आने वाले राजस्थान के क्षेत्रों पर सरकारी प्रतिनिधिमंडल द्वारा विस्तृत प्रस्तुति दी गई।  सीएम ने हर्षित होकर कहा कि अनिल अग्रवाल राजस्थान में अपने निवेश को दोगुना करने और राज्य के व्यापार प्रस्ताव को और मजबूत करने के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाया। सांसद कह रहे हैं कि कंपनी का राजस्थान में ही एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व कर बकाया है। यदि वास्तव में ऐसा है तो फिर जिनका कर बकाया है उनके मालिक से मुख्यमंत्री लंदन में मुलाकात कर खबरों के निवेश का अनुरोध क्यों करते हैं? यह वैचारिक विरोधाभास है या टू फ्रंट प्रेशर पॉलिटिकल टेक्टिक का नमूना है जिसमें जनता को दिखाने के लिए होता कुछ और है और वास्तव में अंदर खिचड़ी कुछ और पक रही होती है। वांछित परिणाम और लक्ष्य भी वे नहीं होते जो जनता के समक्ष दिखाए जा रहे होते हैं।
अब लौटते है उदयपुर सांसद की मुलाकात वाले मुद्दे पर। आज उदयपुर  सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने नई दिल्ली में कोयला, खान एवं स्टील संसदीय समिति के सभापति अनुराग ठाकुर से देश की शीर्ष 10 सीएसआर कंपनियों में शुमार हिन्दुस्तान जिंक पर आरोप लगाते हुए शिकायत की। बताया कि जावर माइंस क्षेत्र में माइनिंग से बढ़ते प्रदूषण, सीएसआर गतिविधियों की कमी से क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी हो रही है। माइनिंग से निकला मलबा (वेस्ट) 38 हैक्टेयर भूमि में रखा हुआ है।  कृषि भूमि भी नष्ट हो रही है। पेयजल के स्त्रोत दूषित हो रहे हैं।  नौ ग्राम पंचायतों में पर्यावरण को अत्याधिक हानि हुई है। वाहनों के ओवरलोड संचालन के कारण क्षेत्र में टीडी से जावर माइंस, ओड़ा से जावर माइंस व पलोदड़ा से जावर माइंस में सडक़ें कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे आमजन को आवागमन में भारी समस्या आ रही है।  कंपनी का राजस्थान में ही एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व कर बकाया है। स्थानीय लोगों को रोजगार में वरीयता शर्त का पूर्णतया उल्लंघन किया जा रहा है।  अब देखना दिलचस्प होगा कि डबल इंजन की सरकार में आखिर कैसे जिंक पर की गई सांसद की शिकायतों का संज्ञान लिया जाएगा। यदि सांसद की बताई समस्याएं नहीं सुलझी तो लोग सांसद पर सवाल उठाएंगे और यदि कार्रवाई का प्रयास भूले भटके हुआ तो राज्य लीडरशिप अपने आर्थिक हितों की दुहाई देती नजर आएगी।

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