24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में गजब का फार्मूला चल रहा है। आप कोई भी जमीन खरीदिये, उसके आस पास यूडीए की कोई भी जमीन है तो उस पर अतिक्रमण कर लीजिए। उसके बाद उसका भरपूर इस्तेमाल कीजिए। कोई अफसर आपको बाल बांका नहीं कर पाएगा। उसके बाद जैसे ही सरकारी स्तर पर जैक जुगाड़ बैठे, उसको अपने नाम पर आवंटित करवा लीजिए। ये आपकी च्वाइस है कि आप उसको समाज के नाम पर लें या फिर स्कूल के नाम पर। जमीन करोड़ों की हो आपको कौड़ियों में मिल जाएगी। आप इसे मजाक समझेंगे लेकिन यह सब वास्तव में हो रहा है। हम बात कर रहे हैं उदयपुर की मंगलम एज्युकेशन सोसायटी याने कि डीपीएस स्कूल की। इस सोसायटी को बार बार नियमों का भुर्ता बनाकर करोड़ों की जमीन कौड़ि़यों में आवंटित की गई। यूडीए ने अब तक कुल चार लाख स्क्वायर फीट से अधिक जमीन डीपीएस को आवंटित कर दी गई है। वैसे तो नियमों को तोड़ने की लंबी फेहरिस्त है लेकिन हम यहां पर कुछ चर्चित बिन्दुओं का उल्लेख करेंगे। जानकार चक्करघिन्नी हुए, क्या ऐसा भी होता है????बताया गया कि पूर्व सरकार से आवंटित 1 लाख वर्गफीट से अधिक जमीन पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जबकि तीन लाख वर्गफीट जमीन यूआईटी पहले ही इस सोसायटी को आवंटित कर चुकी थी। जमीन डीपीएस स्कूल वाली जमीन से सटकर है जो मंगलम एज्युकेशन सोसायटी को समाज बताकर गहलोत सरकार से आवंटित करवाई गई। इस लगभग 1 लाख वर्गफीट बेशकीमती भूमि के आवंटन के खिलाफ जनहित याचिका मनोज अग्रवाल ने हाईकोर्ट में दायर की है। याचिकाकर्ता मनोज अग्रवाल ने भूमि आवंटन नीति 2015 के आधार पर आवंटन को चुनौती देते हुए कहा कि 1 अक्टूबर 2023 को मंगलम एजुकेशन सोसायटी को 9281 वर्ग मीटर भूमि का आवंटन किया गया। जबकि यह भूमि आवंटन नीति 2015 का सरासर उल्लंघन है। नीति में अधिकतम 4000 वर्गमीटर भूमि का आवंटन का प्रावधान है। यूडीए भी स्वीकार कर रहा है कि मंगलम एज्युकेशन सोसायटी उसकी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर चुकी थी। भूमि को बाद में नगरीय विकास विभाग को सोसायटी ने पत्राचार करके उसके पक्ष में नियमित कर देने की मांग की।यूआईटी भुवाणा की आराजी नंबर 3729, 3735 पर 3 लाख 4 हजार 920 वर्गफीट भूमि 2 मार्च 2006 सोसायटी को पहले ही आवंटित कर चुकी थी। बार बार नया आवंटन करने के लिए नगरीय विकास विभाग यूआईटी से जानकारी लेता रहा और केस को विशेष तरीके से डील किया गया। इस जमीन पर जिस मंगलम एज्युकेशन संस्था का कब्जा था उसने यूआईटी पर सिविल सूट अदालत में दायर कर स्टे ले लिया था।इस मामले में यह भी सामने आया कि जो जमीन आवंटित की गई है वह अतिक्रमण कर कब्जा की गई थी। स्कूल की तीनों दिशाओं में सड़कों को साठ-साठ फीट खिसका कर यह कब्जा किया गया था। इस पर तत्कालीन यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता ने कार्रवाई के लिए नोटिस दिया गया था जिस डीपीएस की ओर से स्टे ले लिया गया। बरसों तक इस जमीन का उपयोग किया जाता रहा व बाद में विधानसभा चुनाव से पूर्व गहलोत सरकार की मेहरबानी से मंगलम एजुकेशन सोसायटी को समाज बताते हुए जमीन का आवंटन करवा लिया गया। बाजार मूल्य जमीन का करोडों का है लेकिन कोडियों के भाव आवंटन किया गया है। इससे करोड़ों के राजस्व की चपत लगी है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजसमंद में सीएमएचओ की जांच में नियमांं के विरूद्ध संचालित मिली 6 लेब्स, मौके पर ही ताले लगवाए 21वीं शैक्षणेत्तर कर्मचारी कुलपति चल वैजयंती खेलकूद प्रतियोगिता आंरभ, खेलों से बढ़ती है नेतृत्व क्षमताः डॉ. गुप्ता