24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। कल उदयपुर को नए महाराणा मिलने जा रहे हैं। उनका चित्तौड में राजतिलक होने जा रहा है। इस समारोह पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है। कई राजे रजवाडों केे परिवार व आमजन इस समारोह के साक्षी बनेंगे। बरसों बार हो रहे इस प्रकार के समारोह को लेकर लोगों में भी खासा उत्साह है। राजपरिवार के सदस्य व पूर्व सांसद महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके बड़े बेटे विश्वराज सिंह को मेवाड़ गद्दी मिलने वाली हैं। समारोह सांकेतिक व दस्तूरी हैं लेकिन भावनाओं का ज्वार असली है। सोमवार को इसका जब विश्वराज सिंह के माथे पर रक्त से तिलक होगा तो मेवाड़ के नाथ एकलिंगनाथ के जयकारे गूंज उठेंगे। इतिहास एक बार फिर जीवंत हो उठेगा। नया इतिहास बन जाएगा। दस्तूर कार्यक्रम चित्तौडगढ़ दुर्ग में स्थित फतह प्रकाश महल में होने जा रहा है जिसकी तैयारियां पूरी हो गई है। राज परिवारों की दस्तूर की परंपरा को देखने का अपूर्व उत्साह लोगों में है क्योंकि वे आज भी राज परिवारों से अपना जुडाव महसूस करते हैं। आपको बता दें कि विश्वराज सिंह मेवाड़ अभी नाथद्वारा से विधायक और उनकी पत्नी महिमा कुमारी राजसमंद की भाजपा से सांसद हैं। परिवार में उनका पु़त्र देवजादित्य सिंह और पुत्री जयति कुमारी हैं। आयोजन को लेकर कुछ बहसें भी हो रही हैं लेकिन उनका स्वर काफी कमजोर है। अधिकतर लोगों का मत है कि यह दस्तूरी परम्परा है जिसमें प्रतिभागिता होनी ही चाहिए। इसको संविधान, अधिकारी व राजे रजवाडों के अधिकार आदि के साथ जोड़ कर नहीं देखना चाहिए।
ऐसे होगा पूरा कार्यक्रम मुहूर्त के अनुसार
विश्वराजसिंह एकलिंगनाथजी के 77वें दीवान होंगे दस्तूर या राजतिलक समारोह मुहूर्त के अनुसार होगा। बताया जा रहा है कि उत्तराधिकारी के लिए नई राजगद्दी तैयार की गई है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फतह प्रकाश महल में सबसे पहले राजगद्दी का पूजन किया जाएगा। इसके बाद सलूंबर के रावत देवव्रत सिंह विश्वराज सिंह मेवाड़ का हाथ थाम कर उनको राजगद्दी तक लेकर जाएंगे व वहां पर विराजित करेंगे। राजतिलक की परंपरा में वे अपनी तलवार से अंगूठे पर चीरा लगाएंगे। तब जो रक्त निकलेगा उससे विश्वराज सिंह मेवाड़ के ललाट पर तिलक किया जाएगा। यह रस्म सलूंबर ठिकाने की ओर से इसलिए होती है कि राव चुंडा ने अपना वचन निभाने के लिए आजीवन राजद्दी का त्याग किया था। बदले में राव चुंडाजी को यह अधिकार मिला था कि मेवाड़ राजपरिवार में राजतिलक की परम्परा में तिलक सलूंबर ही करेगा। इसके अलावा परम्परा के अनुसार राजतिलक के दिन ही आश्का की परपंरा होगी। इसमें एकलिंगजी मंदिर उदयपुर, कांकरोली द्वारिकाधीश मंदिर और राजसमंद का चारभुजा मंदिर से आश्का लाई जाएगी। एकलिंगजी मंदिर से धूप की राख और फूल, कांकरोली और चारभुजा मंदिर से फूल लाए जाएंगे जो विश्वराज सिंह मेवाड़ को दिए जाएंगे। एकलिंगजी, कांकरोली और चारभुजा मंदिर से आश्का परंपरा करने के तीन कारण हैं। एकलिंगजी से आश्का का मतलब है कि विश्वराज सिंह मेवाड़ एकलिंगजी मंदिर के दीवान बन जाएंगे। द्वारिकाधीश मंदिर से आश्का इसलिए क्योंकि विश्वराज सिंह मेवाड़ ने वैष्णव गुरु दीक्षा वहां से ही प्राप्त की है। गढबोर चारभुजा मंदिर से फूल लाने की परंपरा है पुरातन है। राजतिलक की रस्म के बाद जयकारों व वैदिक मंत्रों के बीच विश्वराज सिंह मेवाड़ बाहर आकर आमजन से मिलेंगे। यहां से वे उदयपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। उदयपुर आने पर महल में प्रयागगिरी महाराज की धूणी पर दर्शन उसके बाद कुल देवता के दर्शन तथा मावाड के अधिपति एकलिंगजी दर्शन करेंगे। मेवाड के नाथ एकलिंगनाथजी के दर्शन के बाद एकलिंगनाथजी के दीवान के रूप दर्शन करेंगे व पुजारी रंग दस्तूर में चांदी की छड़ी धारण करवाएंगे। यह छड़ी एक प्रकार का दीवान को दी जाने वाली आज्ञा या सहमति है जिसमें एकलिंगनाथ का आशीर्वाद है। इसके बाद शोक भंग रस्म में श्वेत पाग व परिधान को बदल कर रंगीन परिधान धारण किया जाएगा। विश्वराज सिंह मेवाड़ उदयपुर समोरबाग में परिवारजनों व पुराने जागीरदारों के बीच जाकर शोक भंग की रस्म करवाएंगे। उमराव, बत्तीसा, अन्य सरदार और अन्य समाजों के प्रमुख लोग नजराना पेश करेंगे। आपको बता दें कि महाराणा महेन्द्र सिंह का 1984 में राजतिलक सलूम्बर रावत निर्भय सिंह ने किया था। उसके बाद यह राजतिलक समारोह हो रहा है।
अर्थशास्त्र. में स्नातक हैं विश्वराजसिंह
सेंट जेवियर्स कॉलेज मुंबई से अर्थशास्त्र में स्नातक मेवाड़ के 77 वें महाराणा विश्वराज सिंह का जन्म 18 मई 1969 को महाराणा प्रताप की जयंती के दिन हुआ। पिछले चुनावों में उन्होंने अचानक भाजपा की सदस्यता ली और नाथद्वारा से विधायक बने। इसके तत्काल बाद भाजपा ने एक बार फिर अपनी परिवारवाद की लाइन से हटकर पत्नी महिमा कुमारी मेवाड़ को राजसमंद सांसद का टिकट देकर चैंका दिया। चुनाव में जीत कर वे वर्तमान में सांसद हैं।
कल चित्तौड़ में मेवाड़ की राजगद्दी पर विराजेंगे महाराणा विश्वराज, सलूंबर रावत देवव्रत सिंह करेंगे रक्त से तिलक

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