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कल के भारत बंद को राजस्थान में कांग्रेस का समर्थन, उदयपुर को लेकर अब तक फैसला नहीं, संघर्ष समिति ने कहा बंद करवाएंगे

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24 न्यूज अपडेट उदयपुर। अनुसूचित जाति-जनजाति के आरक्षण में क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कार्ट के फैसले के विरोध में बुधवार को भारत बंद का आह्वान किया गया है। राजस्थान में बंद को कांग्रेस ने भी समर्थन दिया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता इस लड़ाई में साथ है व भाजपा आरक्षण के खिलाफ है। जूली ने कहा कि जिस प्रकार भाजपा की मानसिकता है, वह संविधान को कमजोर करने की, आरक्षण को कमजोर करने की है। जूली ने कहा कि अंतिम निर्णय अध्यक्ष करेंगे, लेकिन जहां भी मांग संविधान की है तो पीछे हटने वाले नहीं है, कांग्रेस के कार्यकर्ता इस लड़ाई में साथ रहेगा। इधर, किरोड़ीलाल मीणा ने भारत बंद को बेतुका बताया है। उन्होंने कहा- इसकी कोई जरूरत नहीं है। राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं। क्रीमीलेयर को लेकर देश में जिस तरह से व्यवहार चल रहा है। इसमें मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हूं।
बंद को लेकर अनुसूचित जाति-जनजाति संयुक्त संघर्ष समिति ने राजस्थान में समर्थन दिया है। जयपुर बंद के लिए समिति ने 25 टीमें बनाई हैं, जो बाजार बंद कराएगी। उदयपुर में नेटबंदी व बाजार बंद पहले से होने से लोग तंग आ चुके हैं। अब लगातार छठे दिन बाजार बंद रहे तो विरोध होना तय माना जा रहा है। ऐसे में बंद के सांकेतिक या कुछ समय तक के लिए ही रहने की उम्मीद की जा रही है। बताया गया कि टीमें अपने-अपने इलाके में रैली निकालेगी। उदयपुर में बंद को लकर अब भी असमंजस के बीच कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया है। सभी संगठनो ंको पता है कि पांच दिन से नेटबंदी है व बाजारों में भी व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में उम्मीद यही की जा रही है कि बंद सांकेतिक ही रहेगा। फिर भी संगठन अबंडेकर सर्कल पर पर इकट्ठा होंगे व वहां से टोलियां बंद करवाने निकलेंगी। जितने ज्याद संख्या में लोग आएंगे बंद करने का चांस उतना ही बढ जाएगा। हालांकि स्कूलों को लेकर भी अब तक असमंजस ही है लेकिन सुबह बंद कराने जैसी स्थिति कम ही नजर आ रही है।
इधर, राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा एवं अन्य जनसंगठन एवं प्रगतिशील नागरिक उदयपुर ने विज्ञप्ति में बताया कि सबसे वंचित लोगों को न्याय दिलाने के बहाने आरक्षण के संवैधानिक आधार को कमजोर करना कत्तयी स्वीकार नहीं। सुप्रीम कोर्ट के एससी / एसटी के उप विभाजन के फैसले की आड़ में संविधान विरोधी आरएसएस- बीजेपी जैसी ताकतों के ख़लिफ़ वंचित वर्गों की एकता और संघर्ष को कमजोर करने के कुटिल राजनीति बंद करें। राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चे (माकपा-आकपा-आकपा (माले)-समाजवादी पार्टी) एवं अन्य जनवादी संगठनों की बैठक उदयपुर में आयोजित कि गयी। बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में आरक्षण प्रणाली में बिना जनगणना के ठोस ऑकड़ी के कोटे के भीतर कोटे यानी की एससी/एसटी के आरक्षण के उप-विभाजन क्रीमी लेयर एवं केवल एक बार आरक्षण के सुझावों की कड़ी आलोचना की गई और केंद्र सरकार से इसके खिलाफ तुरंत रिवीजन पिटिशन फाइल करने एवं आरक्षण के वर्तमान सामाजिक और शैक्षणिक आधार के प्रावधानों को संविधान की नवीं सूची में रखने की मांग की गयी। भाजपा एवं केंद्र सरकार की इस मुद्दे पर चुप्पी से उनके वंचित वर्गों में विभाजन की राजनीति की बू आती है जिसका देश भर में आंदोलन चलाकर आंडा फोड़ किया जायेगा। बैठक में शामिल संगठनों ने केंद्र सरकार से जाती आधारित जनगणना तुरंत करवा सभी एससी /एसटी एवं पिछड़ी जातियों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने सहित उच्च न्याय पालिका में भी आरक्षण की मांग की। यह भी मांग की गई कि केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव/ निदेशक स्तर पर लेटरल एंट्री तुरंत रद्ध की जाए। अगर भाजपा वंचित वर्गों के हितों के बारे में जरा भी चिंतित है तो सबसे पहले केंद्र सरकार में सभी आरक्षित रिक्त पदाँ को भरे, निजीकारण बंद करे और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण का प्रावधान करे। इन संगठनों ने इंडिया गठबंधन की पार्टियों से भी जाती आधारित जन गणना एवं बीजेपी के आरक्षण को कमजोर करने की कुटिल राजनीति के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। आहवान करने वालों में अर्जुन देथा, सुभाष श्रीमाली,राजेश सिंघवी, शंकरलाल चौधरी अरुण व्यास आदि शामिल है।

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