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आयड़ जैन तीर्थ में नवपद ओली के 125 तपस्वियों का हुआ सामूहिक पारणा एवं बहुमान

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– साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की 
उदयपुर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ  स्थित आत्मवल्लभ सभागर में आचार्य पदमभुषण रत्न सुरिश्वर व प्रन्यास ऋषभ रत्न विजय, साध्वी कीर्तिरेखा श्रीजी संघ की निश्रा में बुधवार को  नवपद ओली में हुए विशेष पूजा-अर्चना के तहत सभी तपस्वियों को पारणा एवं बहुमान किया गया। विशेष पूजा-अर्चना के साथ अनुष्ठान हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।  स्नात्र पूजा के पश्चात विविध प्रकार की औषधियों से प्रतिमा का अभिषेक किया गया। धर्मसभा मेें आचार्य ने नवपद की आराधना के 125 सदस्यों को सामूहिक पारणा किया गया।   नाहर ने बताया कि आयबिल नवपद ओली के आराधकों का पारणामहासभा की ओर से प्रभावना वितरित की गई।  शेषमल, चोसर देव, अशोक पोरवाल बैंगलोर, ओली के मुख्य लाभार्थी भी यही परिवार था। निर्मला देवी, डॉ. शरद कोठारी, डॉ. हेमन्त कोठारी, नरेन्द्र कुमार, भोपाल सिंह, मनोहरलाल सिंघवी, ललित मेहता, विमला मेहता ने किया। तपस्वियों का बहुमान किया गया। श्री आदिनाथ मंदिर में अंतराय कर्म निवारण की पूजा पढ़ाई गई। नवपद की नौ दिन बहुत ही आराधना आराधना साधना जप-जप के साथ सम्पन्न हुई। साध्वियों ने तप की महिमा को बताते हुए कहा कि तप सभी कठिन कर्मों का नष्ट करने वाली औषधि का रूप है। तप के माध्यम से व्यक्ति सार को जीतने वाला बन सकता है। इस कारण आयबिल तप सर्वोत्तम तप है। इसमें नि: स्वार्थता जैसे गुण समाहित है। आत्मा तपस्या के मार्ग से आगे निकल जाती है। श्रीपाल एवं महासती भयणा सुंदरी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। श्रावक-श्राविकाओं के तप की अनुमोदना की।  इस दौरान महासभा अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या, सतीस कच्छारा, चतर सिंह पामेचा, ललित नाहर, अशोक जैन, राजेन्द्र जवेरिया आदि मौजूद रहे।

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