24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतर्गत चल रहे हैं नौ दिवसीय “अलविदा तनाव हैप्पीनेस“ शिविर के आज छठे दिन तनाव मुक्ति विशेषज्ञ ब्रह्माकुमारी पूनम बहन ने मेडिटेशन (ध्यान , योग) पर विस्तृत चर्चा करते हुए ध्यान द्वारा जीवन में आ रही है समस्याओं के समाधान के तरीके सिखाए । हैप्पीनेस प्रोग्राम के मीडिया प्रभारी विमल शर्मा के अनुसार पूनम बहन ने सर्वप्रथम यह स्पष्ट किया कि आज शारिरिक आसन (योगासन) प्राणायाम को योग की संख्या देना सही नहीं है । वास्तव मे ध्यान, योग, मेडिटेशन का अर्थ होता है जोड़ना अर्थात आत्मा के मन और बुद्धि के तार परमात्मा से जोड़ना ही सही मायने में योग होता है । दुनिया में आज कई तरह के मेडिटेशन प्रचलित है कोई थोटलेट होने को कहते है तो कोई आती जाती सांसों पर ध्यान तो अन्य किसी अंग पर ध्यान केन्द्रित करने पर जोर देते है । मन का स्वभाव सदैव विचार उत्पन्न करना होता है अतः हमारा केन्द्र विचारों को शून्य करना नहीं अपितु नकारात्मक व अर्थविहीन (वेस्टफुल) विचारों को खत्म करना होता है व उनके स्थान पर सकारात्मक व उद्देश्यपूर्ण विचारों को लाना होता है । ब्रह्माकुमारी में सिखाया जाने वाले राजयोग मेडिटेशन में परमात्मा से कुछ मांगा नहीं जाता बल्कि संबंध जोड़ने से स्वतः ही आत्म तृप्ति व संपन्नता का अनुभव होता है । इसमे किसी प्रतिमा कैंडल सूर्य आदि की आवश्यकता नहीं होती यहां सर्वोच्च शक्ति ज्योतिर्बिंदु परमात्मा से सीधा संपर्क होता है । कल सातवें दिन “अलौकिक जन्म उत्सव “ मनाया जायेगा इस मैडिटेशन के तीन स्टेप हैप्रथम : “आत्म दर्शन“आत्मा के सात गुणों से क्रमशः हमारा शरीर नियंत्रित होता है : शांत स्वरुप (फैफडे), शक्ति स्वरुप (हड्डी व मांस पेशियां), पवित्र स्वरुप ( इम्यून सिस्टम), सुख स्वरुप ( पाचन तंत्रं), ज्ञान स्वरुप ( मस्तिष्क ), आनंद स्वरुप ( हार्मोन सिस्टम), प्रेम स्वरुप ( ह््रदय)। अतः सातों गुणो पर चिंतन से पूरा शरीर स्वस्थ्य रहता है ।द्वितीय : परमात्म दर्शनपरमात्मा से प्राप्त हो रही दिव्य रोशनी को अलग अलग रंगो की किरणों के झरने के रुप मे अपने उपर गिरते हुए महसूस करने से निम्नानुसार अनुभूति होति है । हरा रंग (शांति), सुनहरा लाल (शक्ति), सफेद (पवित्रता ), पीला (सुख), हल्का सुनहरा (ज्ञान), बैंगनी (आनंद ) व गुलाबी ( प्रेम – प्यार)तृतीय : स्पिरिच्वल हीलींगबीमारियों से मुक्ति पाने हेतु सर्वप्रथम हम परमात्मा से आ रही दिव्य रोशनी को अपनी आत्मा ( त्रिनेत्र बिन्दु ) पर ऐकत्रित करते है फिर इस पवित्र सफेद रोशनी को अपने शरीर के अंगों पर प्रवाहित करते है । सफेद पवित्र रोशनी मे अधिकतम हीलींग पावर होता है । इसी तरह अगर साधक के आत्मा पर ऐकत्रित दिव्य रोशनी को प्रतिदिन अपने घर / प्रतिष्ठान के अंदर अलग अलग रंगों मे प्रवाहित करने से सातों अलौकिक गुणों से उसे भर देता है। आज के “ध्यान उत्सव“ मे साधकों को अपने शरीर पर दिव्य रोशनी का सुरक्षा कवच बनाना सिखाया गया ताकि किसी प्रकार का दुख उन्हें छू ना पाये। आज के शिविर के पश्चात शिविरार्थियो को ब्रह्माकुमारिज़ सेवाकेंद्र ले जाकर विशेष सतगुरुवार का महत्व बताते हुए परमात्मा शिव बाबा को भोग स्वीकार कराया गया। ब्र कु रीटा बहन ने भोग लगाने की विशेष विधि बताते हुए कहा कि प्रातः 3.00 बजे शिव बाबा को निमन्त्रण देने के बाद यहां के ब्रह्मचारी भाई बहने जो सेंटर पर रोजाना परमात्मा महावाक्य (मुरली) सुनते है वो ही इस प्रसाद को बनाते है। संपूर्ण शुद्धि से भोग बनाकर, परमात्मा को स्वीकार कराया जाता है इस प्रक्रिया मे शिव बाबा स्वयं ऐक लोक नीचे पधारते है। शिव बाबा का यह विशेष प्रसाद बाद मे सभी को वितरित किया गया । Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation आज दूध वाले के सिर पर गिरा, कल नेता या अधिकारी पर भी गिर सकता है पेड़ नाथद्वारा में ब्यूटी पार्लर का काम करने वाली युवती ने किचन में फंदे से लटक कर दी जान