24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। भाजपा में पार्टीग्रहण संस्कार का सिलसिला जारी है। आज उदयपुर में राजस्थान की सह प्रभारी श्रीमती विजया रहाटकर की मौजूदगी में पूरी की पूरी छात्र संघर्ष समिति भाजपा में शामिल हो गई। शामिल होने वाली की लिस्ट में दिलीप जोशी, अमित पालीवाल, सूर्यप्रकाश सुहालका सहित अन्य कई नाम हैं जो बरसों से छात्र राजनीति में संघर्ष का झंडा बुलंद किए हुए थे। उनके कई प्रत्याशी छात्रसंघ अध्यक्ष सहित कई पदों पर रहे। इसी खेमे से कल रवि शर्मा ने जयपुर में पार्टी का दामन थामा था। इस मौके पर राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, प्रमोद सामर, देहात जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्तसिंह व शहर जिलाध्यक्ष रविन्द श्रीमाली सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी रही। सूर्यप्रकाश सुहालका ने इस अवसर पर कहा कि देश को स्थिर सरकार देने वाली एकमात्र पार्टी भाजपा ही है। छात्र संघर्ष समिति उदयपुर संभाग का सबसे बडा छात्र संगठन है। हमने चार अध्यक्ष दिए व रिकॉर्ड तोड मतों से विजय हासिल की मगर कई कारणों से हम उन्हें आगे नहीं बढा पाए। सबकी अपनी अपनी विचारधार थी। सबकी इच्छा थी कि छात्र संघर्ष समिति का विलय भाजपा में हो जाए, अब हमारा पुनर्मिलन हुआ है। कई साथी कांग्रेस छोड कर आए हैं। आने वाले दिनों में डेढ सौ से 200 युवा पार्टी ज्वाइन करेंगे।अब शुरू होगा असली संघर्षछात्र संघर्ष समिति से जुड़े सभी युवा हालांकि भाजपा विचारधारा परिवार से ही आते हैं व पार्टी की रीति-नीतियों में घुले मिले हुए हैं लेकिन अंदरखाने इन सभी आगंतुकों के एडजेस्टमेंट को लेकर नए संघर्ष की शुरूआत होना तय माना जा रहा है। पार्टी में अब तक जड़ें जमाए बैठे लोगों को भी अब अपनी पॉलिटिकल री पोजिशनिंग करनी पड़ सकती है। संघर्ष समिति से जुड़े समूह के सभी युवा तेजतर्रार हैं, अच्छे वक्ता हैं और अपने-अपने क्षेत्रों के महारथी भी हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी इनका आने वाले छात्रसंघ चुनावों से लेकर निकाय चुनावों तक में कैसे इस्तेमाल कर पाती है। इसकी पहली परीक्षा लोकसभा चुनाव के बाद होने वाली है जब छात्रसंघ चुनाव होनी तय है। उसमें भाजपा में शामिल हुई छात्र संघर्ष समिति और भाजपा की अपनी ऑरिजनल छात्र इकाई के बीच रस्साकशी होना तय है। इसके बाद पार्टी का दामन थामने वाले महारथियों में से पार्षद बनने की महत्वाकांक्षा मन में दबाए आशार्थी भी निकाय चुनावों में अंदरूनी गणित और पहले से बनी बनाई कैमिस्ट्री को ध्वस्त कर सकते हैं और कुछ भी टिकट पा गए तो जाजम बिछाने वालों को फिर निराशा हाथ लग सकती है। बाहर से आने वाले अपनों से मुकाबला इसलिए भी टफ हो जाएगा क्योंकि उनके पास भी पार्टी का बेकलॉग है। कुल मिलाकर अब तक कंफर्ट जोन में रह कर राजनीत कर रहे उदयपुर भाजपा के सीनियर और जूनियर दोनों कैडर के नेताओं के लिए अब ज्यादा सतर्क और ज्यादा धारदार राजनीति करने का वक्त आ गया है। यदि चौकस नहीं रहे तो दूसरा कोई भी कंपीटीटर कभी भी उनकी कुर्सी पर विराजमान हो सकता है। देखना दिलचस्प होगा कि कैसी रहेगी यह कुर्सी रेस!!!!! Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation बाबा रामदेव का माफीनामा फिर नहीं हुआ कुबूल, कोर्ट ने 23 को फिर बुलाया, कहा- लग नहीं रहा कोई हृदय परिवर्तन हुआ है सलमान के घर के बाहर फायरिंग के 2 आरोपी गिरफ्तार, सूरत की नदी में फेंकी थी पिस्तौल